कुंडलिनी जागरण: लक्षण, अवस्थाएँ, जोखिम और साधना का सुरक्षित मार्ग
भूमिका: सुप्त शक्ति का रहस्य मानव शरीर केवल मांस, अस्थि और रक्त का ढांचा नहीं है। इसके भीतर एक सूक्ष्म ऊर्जा तंत्र कार्य करता है, जिसके केंद्र में एक दिव्य शक्ति सुप्त अवस्था में स्थित रहती है। इस शक्ति को शास्त्रों में कुंडलिनी कहा गया है। यह शक्ति मूलाधार चक्र में सर्पिणी की भाँति कुंडली […]
